Edible Oil Price:रसोई में इस्तेमाल होने वाला खाना बनाने का तेल हर घर की जरूरत है। चाहे सब्ज़ी बनानी हो, तड़का लगाना हो या पूड़ी तलनी हो, तेल के बिना खाना बनाना मुश्किल है। पिछले कुछ सालों में तेल के दाम लगातार बढ़ते रहे, जिससे आम लोगों के बजट पर दबाव पड़ा। लेकिन हाल ही में GST में बदलाव के बाद बाजार में खाने के तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है। इस बदलाव से खासकर मध्यम वर्ग और सीमित आय वाले परिवारों को राहत मिल सकती है।
GST बदलाव का असर तेल की कीमतों पर
किसी भी सामान की कीमत सिर्फ उत्पादन लागत से तय नहीं होती, उस पर टैक्स का असर भी होता है। GST यानी गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स की दरों में बदलाव होने पर रोजमर्रा की चीज़ों के दाम प्रभावित हो सकते हैं। खाने के तेल पर भी यही असर दिखाई देता है। जब टैक्स दर कम की जाती है या स्ट्रक्चर में बदलाव होता है, तो कंपनियों की लागत घटती है। अगर यह फायदा सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचे, तो तेल की कीमत में गिरावट महसूस की जा सकती है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार के दाम, कच्चे माल और ट्रांसपोर्टेशन की लागत भी तेल की कीमत पर असर डालते हैं, इसलिए केवल GST बदलाव ही इसका एक कारण नहीं है।
सरसों तेल के ताजातरीन रेट
सरसों का तेल भारतीय रसोई में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला तेल है। उत्तर भारत के कई राज्यों में यह रोजमर्रा का मुख्य कुकिंग ऑयल है। बाजार में विभिन्न ब्रांडों के सरसों तेल के दाम अलग-अलग चल रहे हैं। कई शहरों में रिटेल मार्केट में सरसों तेल 170 से 190 रुपये प्रति लीटर के बीच बिक रहा है। लोकल और बड़े ब्रांडों में थोड़ा अंतर हो सकता है। थोक मंडियों, सुपरमार्केट या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर ऑफर और डील के कारण दाम कम या ज्यादा हो सकते हैं।
रिफाइंड तेल के दाम
शहरों में सोयाबीन, सनफ्लावर और पाम ऑयल जैसे रिफाइंड तेलों की मांग अधिक है। इनकी कीमत ब्रांड, पैक साइज और स्थान के हिसाब से बदलती रहती है। वर्तमान में कई जगहों पर रिफाइंड तेल लगभग 105 से 145 रुपये प्रति लीटर के बीच मिल रहा है। सस्ते ब्रांड इससे कम दाम पर उपलब्ध हो सकते हैं, जबकि प्रीमियम ब्रांड थोड़े महंगे हैं। ऑफर, थोक खरीद और फेस्टिव डिस्काउंट के कारण ग्राहकों को अतिरिक्त फायदा मिल सकता है।
पैकिंग में बदलाव का असर
हाल के समय में कई कंपनियों ने तेल के पैक साइज में बदलाव किया है। पहले 1 लीटर का पैक मिलता था, लेकिन अब कई ब्रांड 850 या 900 मिलीलीटर के पैक उसी कीमत पर बेच रहे हैं। इसलिए ऊपर से देखने पर लगता है कि दाम नहीं बढ़े, लेकिन वास्तव में ग्राहक को कम तेल मिल रहा है। इससे रसोई के मासिक बजट पर असर पड़ता है। खरीदते समय पैक पर लिखी मात्रा पर ध्यान देना जरूरी है।
किसे मिलेगा ज्यादा फायदा
तेल की कीमत में थोड़ी भी गिरावट उन परिवारों के लिए सबसे ज्यादा राहत देती है जिनकी आय सीमित है। छोटे शहरों और गांवों में रहने वाले मिडिल क्लास परिवारों के लिए रसोई का खर्च पहले ही सीमित बजट में रहता है। इसके अलावा छोटे होटल, ढाबे और स्ट्रीट फूड कारोबार करने वाले लोग भी तेल की कीमत पर काफी निर्भर हैं। तेल सस्ता होने से उनकी लागत कम होती है और वे ग्राहकों को सस्ती सेवा या अधिक मुनाफा दे सकते हैं।
भविष्य में तेल की कीमतों का रुझान
खाने के तेल की कीमतें केवल देश के GST या आंतरिक फैसलों पर निर्भर नहीं करतीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार और आयात पर भी असर पड़ता है। भारत काफी मात्रा में तेल आयात करता है, खासकर पाम और सनफ्लावर तेल। अगर अंतरराष्ट्रीय दाम बढ़ते हैं या सप्लाई में कमी आती है, तो भारत में तेल के दाम बढ़ सकते हैं। इसलिए फिलहाल जो राहत दिख रही है, वह हमेशा स्थायी नहीं होगी।
समझदारी से खरीदारी
सिर्फ कीमत कम होने का इंतजार करना काफी नहीं है। ग्राहकों को ब्रांड, पैक साइज, गुणवत्ता और रेट देखकर ही खरीदारी करनी चाहिए। लोकल मार्केट, ऑनलाइन स्टोर और थोक दुकानों में दामों की तुलना करके बचत की जा सकती है। इसके साथ ही तेल का इस्तेमाल सोच-समझकर करना भी जरूरी है, ताकि रसोई का खर्च नियंत्रित रहे और सेहत भी बनी रहे।
Disclaimer: यह लेख सामान्य बाजार रुझानों और उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। खाने के तेल की कीमतें शहर, ब्रांड, टैक्स नीति और सप्लाई की स्थिति के अनुसार बदल सकती हैं। सटीक रेट जानने के लिए स्थानीय बाजार, आधिकारिक स्रोत या विक्रेता से जानकारी लें। यहाँ दी गई जानकारी को अंतिम मूल्य या सरकारी घोषणा न माना जाए।









